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पाबंदी के बाद वर्डप्रैस पर हर तरफ बदनाम हुआ तुर्की का अदनान

पाबंदी के बाद वर्डप्रैस पर हर तरफ बदनाम हुआ तुर्की का अदनान. इंटेरनेट पर पाबंदी लगाना कैसे नामुमकिन है यह हमने पिछले साल अपने यहां भी देखा था। अब तुर्की में भी यही हो रहा है। पूरे देश में वर्डप्रैस पर पाबंदी लगा दी गयी है। पूरी बात अब वर्डप्रैस ने अपने चिट्ठे पर लिखी है। वहां के एक चिट्ठाकार ने वहां के एक धर्म गुरू अदनान ओकतार जो कि हारुन याह्या के नाम से भी पुस्तकें लिखते हैं के खिलाफ लिखा तो उनके चिट्ठे पर पाबंदी लगाई गयी। उन्होंने अपनी एक पोस्ट लिख कर अपने पाठकों से अपील की कि वे अदनान के नाम से अथवा उसके नाम से मिलते जितने भी नाम संभव हों उन सब नामों से नये चिट्ठे बनायें और मेरे लेखों को कापी कर छाप दें जिससे पाबंदी के बावजूद गूगल पर सर्च करने पर अधिक से अधिक प्रतिबंधित प्रविष्टियां मिल जायें।

“In order to make people hear our voice, let everyone start new blogs from
websites such as http://blogcu.com or http://wordpress.com and let them copy the
posts on those blogs and paste them to their own. You can start several at once,
if possible. Please remember that the name you will give to the blogs, should be
related to Adnan Oktar or Harun Yahya in order to find them quickly through
Google search. If the names are already taken, you can solve this problem by
using characters such as “_” (Adnan_Oktar) or numbers such as AdnanOktar100,
Adnan_Oktar_50.”

इसके बाद जब इस तरह के बहुत से नये चिट्ठे बन गय्रे तो सारे वर्डप्रैस को ही प्रतिबंधित कर दिया गया। इस पर विस्तार से आप वर्डप्रैस के चिटठे पर यहां पढ़ें।

इसी पोस्ट पर तुर्की के एक पाठक की यह टिप्पणी भी ध्यान देने लायक है जिसमें उन्होंने लिखा है कि किस तरह यह व्यक्ति अपने खिलाफ लिखने वालों पर पाबंदियां लगवा रहा है:

This person’s current strategy is to block all the sites which attacks him
and his ideas. A few months ago, he made a similar move and blocked “eksi
sozluk”, an open dictionary which is, in my opinion, a bastion of free speech in
turkish online media, with more than 10.000 writers and about 2.000 entries each
day.
Adnan Oktar is taking advantage of the gaps in Turkish laws on the
internet, which are sadly on their infancy, to silence all the voices against
him. Internet poses a real threat to people like him, where ideas are exposed,
and people read them!

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