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समझो हो ही गया…..

ऐ भाई
भाई बहुत खुश लग रह हो भाई
बात क्या है?
ऐ भाई हुआ क्या- २
ऐ भाई बोल न यार हुआ क्या
कार्ड छपवा ले


ऐ भाई हुआ क्या
सूट सिलवा ले
समझो हो ही गया
बोला न
समझो हो ही गया – ३
ऐ भाई रिवर्स में काहे को स्टोरी सुना रहा है ये स्टार्टिंग से सुना ना तुम बिलाग बनाके क्या बन गया?
अरे बिलाग मत पूछ यह पूछ कि चिट्ठा बनाके क्या बन गया?

क्या बन गया भाई?
अरे उदीयमान चिट्ठाकार बन गया यार….
ऐ भाई साईड्कार सुना, कलाकार सुना, बेकार सुना, डकार भी सुना
ये चिट्ठाकार क्या होता हैं?

अरे जो चिट्ठा लिखते है यार
तरकश पर चुन रहे उदीयमान चिट्ठाकार
टाप टेन में आया अपना भी नाम यार
भाई कम्प्यूटर पर हिंदी लिखना भोत मुश्किल है
कैसे मैनेज किया?

अरे अक्षरग्राम पर जा के इक चटका जब लगाया
मुझको चिट्ठा लिखने का आईडिया फिर आया
वंदेमातरम का आईना पर पोस्ट इक लगाया
अरे भाई तू तो जीनियस है
फिर क्या हुआ?

कभी टिप्पणी इधर कभी टिप्पणी उधर
समीर भाई बोला इतने साल थे किधर
ऐसे हो गया भाई?
अरे समझो हो ही गया
समझो हो ही गया -२
उसके बाद तुम चिट्ठे पर क्या लिखा कविता?
नही रे
जैपनिस हाईकु?
नही रे मुन्ना सर्किट की कहानी
मुन्ना सर्किट काहे कु
मुन्ना सर्किट का किस्सा
मैने आईना पर जब सुनाया
आईना हुआ पापुलर हर कोई पढ़ने आया
भाई फिर क्या हुआ?
सब ने किया शोर
बोले लिखो थोड़ा और
किस्सा पसन्द आया मामू लिखो वन्स मोर
अरे भाई तेरे को मामु बोल डाला फिर क्या हुआ?
प्यार से सब ने मुझको ऐसे गले लगाया
क्या बताऊं सरकिट अरे कितना मजा आया
अरे समझो हो ही गया
समझो हो ही गया -२
तो भाई दे रहे हो न वोट?

13 thoughts on “समझो हो ही गया…..”

  1. मामू मैं इसको गाकर पढ़ रहा हूं.. बड़ा रिदमिक है.. मुंबई में चांस आज़माओ ..

  2. आपका मूषकरजी का साक्षात्कार अकेला ही आपको जितवा देता. बहुत ही बेहतरीन लेख था वह – बोले तो ब्लाग जगत का “मुगल-ए-आज़म”.

    हार्दिक शुभकामनायें.

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