पुनर्जन्म हो यदि मेरा !

दिल्ली से सटे नॉएडा के निठारी में एक दिल को दहला देने वाला काण्ड हो गया. आये दिन यहाँ बच्चे गायब होने की खबर आती. बाद में बच्चों के विभात्स्व तरीके से मारे जाने के किस्से सुनाने में आये. आपने अमिताभ जी को उत्तरप्रदेश के लिये एक विज्ञापन में बोलते हुए देखा होगा। यदि यही विज्ञापन उन बच्चों में से कोई बोलता जो नोएडा के निठारी गांव में दरिंदों द्वारा मारे गये तो शायद कुछ यूं बोलता:

 

पुनर्जन्म हो यदि मेरा
न कभी हो यमुना के तट पर
नोएडा शहर की माटी पर
हड्डियां दबी हैं सड़कों पर
जान के दुश्मन लपक पड़े
काम पे जाते लड़कों पर
पढ़ने जाती हर लड़की पर
निठारी के आंगन और खिड़की पर
हड्डियां नाली और सीवरों पर
बच्चों के बिकते लिवरों पर
कितनों का आंगन उजड़ गया
एक काला सूरज निगल गया
पुनर्जन्म हो यदि मेरा
न कभी हो यमुना के तट पर

17 thoughts on “पुनर्जन्म हो यदि मेरा !

  1. अमिताभ बच्चन को इस प्रचार में देख कर और उत्तर प्रदेश की हालत देख कर शर्म आती है। प्रशासन के लिए पैसा है नहीं और अमिताभ बच्चन को इस प्रचार के लिए देने के लिए करोड़ों रुपए हैं। भ्रष्टाचार की असीम पराकाष्ठा है उत्तर प्रदेश।

  2. बहुत ही विचलित कर देने वाली घटना है, कभी कभी मानव होने पर ही शर्म आने लगती है.
    आपने अपनी भावनाओं को बखुबी व्यक्त किया है.

  3. कभी कभार लगता है अमिताभ अब अमर सिंह और मुलायम की कठपुतली बन गये हैं। अब इस विज्ञापन में काम करने के बाद तो यह पक्का लगता है!
    शर्म शर्म, मुलायम, अमर और अमिताभ

  4. काव्य का सटिक प्रयोग.

    एक शर्मसार कर देने वाली घटना पर आप द्वारा किया गया काव्यात्मक प्रहार सराहनिय है. लिखते रहें.

  5. तारीफ के लिये आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद।

  6. ऐसी कौन सी धरती है आईना जी, जहां कोई बच्चा पैदा होगा, तो इस निश्चितता के साथ, कि उस के साथ इस तरह का वाकया नही होगा, और हिन्दुस्तान में ऐसी कौन सी पुलिस है, जो आसानी से, बिना घूंस खाये, गरीब की रपट लिख लेगी?
    अकेले उत्तर प्रदेश को गाली दे कर क्या होगा?

  7. बच्चों के साथ जो हो रहा है उत्तर भारत में तो लगता है सभी यही कहेंगे
    पुनर्जन्म हो यदि मेरा
    न कभी हो उत्तर भारत में

    ६-७ लाईन में ही आपने बहुत कुछ कह दिया

  8. निठारी कांड पर आक्रोश व्यक्त करने के लिये शब्द नही है मेरे पास

  9. […] वाले… नाक के रखवाले ओ मैडम जी बचाओ ! पुनर्जन्म हो यदि मेरा ! “पता नहीं सरकिट……. !” चुनने को है क्या? […]

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