सावधान! आपकी निजी सूचनायें कोई बेच तो नहीं रहा!

कल पार्किंग में गाड़ी खड़ी करके ऑफिस की ओर जाने लगा तो एक युवक टकरा गया। “माफ करें सर! आपसे दो मिनट बात कर सकता हूं?” मैंने हामी भरी तो उसने बताया “सर मैं एमबीए कर रहा हूं और अपने एक प्रोजेक्ट जो कि लोगों के निवेश की आदतों पर है के लिये सर्वे कर रहा हूं। क्या आप मुझे कुछ जानकारी देना चाहेंगे।”

“अवश्य, मगर अपना नाम, पता और फोन नम्बर नहीं बताऊंगा” मैंने कहा। “सर यह सब तो बहुत जरूरी है, इसके बिना काम नहीं चलेगा।” मैं चलने को हुआ तो युवक दयनीय सा हो कर बोला “सर प्लीज़ बता दीजीये ना?” इस बार मैं कुछ झुंझला कर जोर से बोला “भई सर्वे कर रहे हो तो नाम और संपर्क की क्या जरूरत है?” इस बार युवक खुल कर बोल पड़ा ” दरअसल मैं एक कम्पनी  के लिये डाटा एकत्र कर रहा हूं और जितना डाटा शाम तक इकट्ठा होगा मुझे उसी हिसाब से पैसे मिलेंगे।”

 

मैं तो यह देख सुन कर हैरान रह गया। एक भोला सा युवक जो अपने एक निजी प्रोजेक्ट के लिये सहायता मांग रहा था असल में मुझ से मेरी सारी निजी जानकारी जैसे कि मैं कहां कहां और कितना कितना निवेश करता हूं, शेयर बाजार, म्यूचल फंड, बैंक डिपॉज़िट ले लेता और फिर मेरे नाम, पते और मोबाईल नम्बर के साथ बाजार में वह या उसकी कम्पनी जिसके लिये वह काम करता है, इस जानाकारी को बेच देते। मुझे आइडिया तो था कि लोग इस तरह से भी डाटा एकत्र करते हैं मगर मेरे साथ यह पहली बार हुआ था। इस प्रकार की सूचनायें तथा डाटा टेली मार्कटिंग के काम की रीढ़ है। आप लाख कोशिश कर लें मगर ये लोग इन सूचनाओं का जुगाड़ कर ही लेते हैं। अगली बार जब आपके पास किसी टेली मर्केटिंग वाले या वाली का फोन आये तो हैरान न हों अगर आपके बारे में उनके पास आपकी कई गोपनीय जानकारियां पहले से हो मौजूद हों। इस तरह की जानकारियों और सूचनाओं का बहुत बड़ा बाजार है जहां आपके बारे में जानकारियां मंहगे में बिकती हैं।

इस तरह की जानाकारियां कई बार बैंको में काम करने वाले जुटा कर इन लोगों को खाते नम्बर और बैंक बैंलेस की सूचना के साथ बेच देते हैं। सिर्फ दो रुपये प्रति जानकारी के रेट से।

कई बार जब हम ऑफिस में बैठे होते हैं तो लोग कई बहानों से हमारा विज़िटिंग कार्ड मांग कर ले जाते हैं। याद कीजिये पिछली बार कोई आया हो यह कहने कि हम लोग का प्रिंटिंग प्रैस है, यदि आपको कोई प्रिंटिंग का काम हो तो हमें दीजिये या हम लोग कम्प्यूटर रिपेयर करते हैं यदि आपको कोई काम हो तो हमें दीजिये। ये लोग जाते जाते आपका विज़िटिंग कार्ड ले जाते हैं। एक रुपये में छपा आपका विज़िटिंग कार्ड चार रुपये तक में बिक जाता है। आप के नाम के साथ साथ, आपकी कम्पनी का नाम, आप किस पद पर कार्यरत हैं, आपके फोन नम्बर सब सूचनायें बिकाऊ हैं। जिस तरह के बाजार में हम पहुंच रहे हैं वहा अपने बारे में जानाकारियों को किस तरह से छिपा कर रखा जाये इस बारे में अभी सतर्कता या जागरुकता हम लोगों मे बिल्कुल नहीं आयी है।

हमारे बैंक इन विषयों पर कितने जागरूक हैं इसका एक उदाहरण आपको देता हूं।

एक बार मैं एक निजी बैंक के काऊंटर पर खड़ा था। साथ साथ बने चार काऊंटरों पर लगभग पचास लोग बेहद करीब करीब खड़े थे। काऊंटर पर बैठी महिला बहुत जोर जोर से बोल रहीं थी। पता नहीं उनकी आवाज ही तेज थी या शीशे के आर पार ग्राहकों से बात करने के कारण उनकी यह आदत बन गयी थी। मेरे आगे एक सज्जन पुरूष खड़े थे। अचानक से वो महिला बैंक कर्मचारी जोर से उन सज्जन से बोलीं “अरे! आपने साढ़े पांच लाख रुपये यूं ही सेविंग एकाऊंट में क्यों रखे हुए हैं।” सज्जन बहुत ही भद्र थे। कुछ बोल न पाये। मगर आप ही बताइये इस तरह की बात इस प्रकार से इतने लोगों के बीच एक बैंक कर्मचारी द्वारा बोलना क्या ठीक है? हमारे यहां न तो बैंकिंग तथा निवेश की सेवायें देने वाले इतने प्रोफेशनल होते हैं कि ग्राहक की निजता का आदर कर सकें और न ही ग्राहक इतने जागरूक हैं जो इस सब का विरोध कर सकें।

10 thoughts on “सावधान! आपकी निजी सूचनायें कोई बेच तो नहीं रहा!

  1. बिल्कुल ठीक रवी जी आपने सही नब्ज पकडली कई बार लोग आफ़िस मे आकर डाटा और कार्ड लेकर चले जाते है मै भी पिछले दिनो हुई एक प्रिन्टिग की गलति की वजह से इस मामले को समझ पाया वरना ये समीर भाई के टैमा वाले तंग कर देते है और मै सोचता रह जाता था कि इन्हे मेरा प्रोफ़ाइल किसने दिया होगा.?मेरा विजिटिंग कार्ड गलत छप गया था और वही गलति से टैमा के हाथ पड गया जब मेरे पास गलत नाम से कई फ़ोन आये तब मै समझा और तब से मै एसे किसी को भी भगाने के अलावा और कॊइ बात नही करता

  2. जगदीश जी; ये लोग अनेकों तरह से सूचना एकत्र करते रहते हैं. अप जब भी प्रगति मैदान जाते हैं, तो कई लड़कियां आपको घेर लेतीं है और एक ड्रा का फार्म भरवातीं हैं. इन लोगों से बचना बहुत ही मुश्किल है.

    बैंक के मामले में मेरा बैंक तो बहुत अच्छा है, मेरी निजता का पूरा आदर करता है.

  3. यह रोना हर जगह है. इस तरह की सूचना बेचा जाना और चुराया जाना एक बहुत बड़े व्यापार का रुप ले चुका है. इनके रोकथाम के कानून भी अभी बहुत असरकारक नहीं हो पा रहे हैं. अच्छी जानकारी दी.

  4. हम्‍म
    अच्‍छा चिट्ठाकारी के बाहर भी ऐसे लोग हैं जिन्‍हें निजता में खलल में आनंद आता है और उन्‍हें तो नकद नारायण मिलता है।…हमारे यहॉं के लोग केवल स्‍वांत: सुखाय ऐसा करना पसंद करते हैं।

    कौन प्रशिक्षण देता है इन्‍हें…परिचितों में से तो कोई नहीं न। 🙂

  5. Ye bharat hai, yaha logo ki manhsthiti hai SAB KUCH CHALTA HAI wala hai. Inhe kanoon se bhi dar nahi hai. Inke liye paisa hi sab kuch hai, kewal paisa.

  6. आजकल हर तरह के लोग अनुसंधान के नाम पर नाम, पता और फोन नम्बर पूछते हैं. अकसर यह सिर्फ आपके बारे में जानकारी संग्रह करने का एक जरिया होता है. ऐसी जानकारियां अनधिकृत लोगों को कतई न दें.

  7. मैं तकरीबन हर रोज़ ऐसे परेशान करने वाले कॉल्स रिसीव करता हूं। बस अब इंतज़ार है इस मामले में ट्राइ के किसी फैसले का। हालांकि ये कॉल्स कई बार आपके काम के भी निकल आते हैं। मसलन आपको किसी ख़ास चीज़ की ज़रूरत हो, क्रेडिट कार्ड, होम लोन इत्यादि और ऐन वक्त पर आपके पास कोई ऐसा कॉल आ जाएं तो भला ही लगता है। लेकिन एक-एक दिन में इतने सारे अनचाहे कॉल्स रिसीव करना, वो भी किसी असहज मौकों पर, बहुत खीज देता है। आपने जो बैंक वाला वाक़या बताया, वो वाकई बहुत गंभीर मसला है। उस महिला ने अतिउत्साह में बड़ी भूल की। इसका वो ख़ामियाज़ा भुगत सकती थी। वैसे प्रोफेश्नलिज़्म की बात तो हमारे यहां काफ़ी होती है, लेकिन इसका मतलब फिलहाल सिर्फ यहीं तक सीमित है कि काम से काम रखो। अभी पक्के प्रोफेशन कम ही हैं यहां।

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