गंजहों की गोष्ठी – चुटीले अंदाज में तीर

गंजहों की गोष्ठी

गंजहों की गोष्ठी साकेत सुर्येश द्वारा लिखित हिंदी व्यंग पुस्तक है। सकेत जी को जिन्होंने ट्विटर पर पढ़ा है वह जानते हैं की किस तरह इस तरह के चुटीले वाक्य उनकी विशेषता हैं। आज के समय में जब सोशल मीडिया पर हर कोई राजनैतिक बहस में पड़ा है, राजनीति में हो रहे हर समय के … आगे पढ़ें

Poem by Amrita Pritam – Ek Shehar एक शहर – अमृता प्रीतम

Poem by Amrita Pritam

Ek Shehar Poem by Amrita Pritam एक शहर – अमृता प्रीतम 1. अस्पताल के दरवाजे पर हक, सच, ईमान और कद्रें, जाने कितने ही लफ्ज़ बीमार पड़े हैं इक भीड़ सी इकट्ठी हो गयी है, जाने कौन नुस्खा लिखेगा जाने यह नुस्खा लग जायेगा, लेकिन अभी तो ऐसा लगता है इनके दिन पूरे हो गये… … आगे पढ़ें

राजनीति के ’पिंजर’ में फंसा लोकतंत्र

अमृता प्रीतम का उपन्यास ’पिंजर’ मैंने  तब  पढ़ा था पहली बार जब में स्कूल में ही था। उसके बाद जाने कितनी ही बार पढ़ लिया। आज जब हम आजादी की सालगिरह मना रहे हैं तो मन कहता है कि इस उपन्यास के बारे में कुछ लिखूं। बंटवारे की पृष्टभूमी पर लिखे गये इस उपन्यास पर … आगे पढ़ें

मंटो की कहानी टोबा टेक सिंह Toba Tek Singh by Manto

मंटो की कहानी – टोबा टेक सिंह Toba Tek Singh by Manto मंटो की कहानी टोबा टेक सिंह : बंटवारे के दो तीन साल बाद पाकिस्तान और हिंदुस्तान की हुकूमतों को ख्याल आया कि इखलाकी क़ैदियों की तरह पागलों का तबादला भी होना चाहिए यानी जो मुसल्‌मान पागल, हिंदुस्तान के पागल-ख़ानों में हैं उन्हें पकिस्तान … आगे पढ़ें

शिव कुमार बटालवी के कुछ गीत

Shiv Kumar Batalvi

शिव कुमार बटालवी के कुछ गीत Songs By Shiv Kumar Batalvi शिव कुमार बटालवी के गीतों को बड़ी शिद्दत से पंजाब में पढ़ा जाता है. आप भी पढ़िए उनके बटालवी के कुछ गीत.

माँ – निदा फा़ज़ली Maa by Nida Fazli

माँ – निदा फा़ज़ली Maa by Nida Fazli निदा फा़ज़ली की तीन नज़्में एक दिन सूरज एक नटखट बालक सा दिन भर शोर मचाए इधर उधर चिड़ियों को बिखेरे किरणों को छितराये कलम, दरांती, बुरुश, हथोड़ा जगह जगह फैलाये शाम थकी हारी मां जैसी एक दिया मलकाए धीरे धीरे सारी बिखरी चीजें चुनती जाये। माँ … आगे पढ़ें

वारिस शाह नूं – अमृता प्रीतम

आज बैसाखी के अवसर पर अमृता प्रीतम की एक रचना और उसका हिंदी अनुवाद। 1947 पर लिखी गयी यह रचना वारिस शाह को संबोधित है जिन्होंने ‘हीर’ लिखी थी। हीर कहानी है हीर के अपने रांझे से बिछुड़ने की. वारिस शाह ने हीर की पीड़ा लिखी थी. यहाँ अमृता उलाहना दे रहीं हैं कि जब … आगे पढ़ें

अमृता प्रीतम की कुछ कवितायें Poems By Amrita Pritam

अमृता प्रीतम की कुछ कवितायें Poems By Amrita Pritam एक मुलाकात मैं चुप शान्त और अडोल खड़ी थी सिर्फ पास बहते समुन्द्र में तूफान था……फिर समुन्द्र को खुदा जाने क्या ख्याल आया उसने तूफान की एक पोटली सी बांधी मेरे हाथों में थमाई और हंस कर कुछ दूर हो गया हैरान थी…. पर उसका चमत्कार … आगे पढ़ें

ये तलवार वाले… नाक के रखवाले

केमिकल लोचा- संदर्भ :- गांधीगिरी. मित्रो, यहाँ प्रस्तुत है मेरी लिखी एक कविता ये तलवार वाले… नाक के रखवाले. यूं तो मैं कोई कवि नहीं हूँ मगर कभी कभी यूं ही अपने विचार इस तरह से प्रगट कर देता हूँ. आशा है मेरा यह प्रयास आपको पसंद आएगा. कुछ दिन से ढंग से मैं सो … आगे पढ़ें

अमृता प्रीतम की एक कविता Poem by Amrita Pritam

अमृता प्रीतम की एक कविता Poem by Amrita Pritam एक घटना तेरी यादें बहुत दिन बीते जलावतन हुईं जीतीं हैं या मर गयीं- कुछ पता नहीं सिर्फ एक बार एक घटना हुई थी ख्यालों की रात बड़ी गहरी थी और इतनी स्तब्ध थी कि पत्ता भी हिले तो बरसों के कान चौंक जाते.. फिर तीन … आगे पढ़ें