सत्या, हत्या और साहित्या !!!

“मुन्नाभाई, अपुन सत्या सुना, हत्या सुना पर ये साहित्या क्या होता है?” “अरे सरकिट, साहित्या नहीं साहित्य, लिट्रेचर।” “लिट्रेचर?” “सरकिट तुम लाइब्रेरी में अलमारियों में भरी किताबें देखीं हैं ना

सरकिट का भी ब्लॉग

आईना ब्लॉग पर पॉपुलर मुन्नाभाई श्रेणी में एक और पोस्ट सरकिट का भी ब्लॉग आज प्रस्तुत है.  उम्मीद है आपको पसंद आयेगा. मुन्नाभाई श्रेणी के बाकी पोस्ट यदि आपने ना

ये तलवार वाले… नाक के रखवाले

केमिकल लोचा- संदर्भ :- गांधीगिरी. मित्रो, यहाँ प्रस्तुत है मेरी लिखी एक कविता ये तलवार वाले… नाक के रखवाले. यूं तो मैं कोई कवि नहीं हूँ मगर कभी कभी यूं

पता नहीं सरकिट……. !

पता नहीं सरकिट……. ! “हैलो सरकिट,” “अरे मुन्नाभाई कैसे हो, अब तो तुम्हे बहुत टाईम हो गया चिट्ठा गिरी करते। क्या समाचार हैं चिट्ठा जगत के? ” “अरे कुछ मत

लगे रहो मुन्ना भाई

हैल्लो सरकिट अरे मुन्ना भाई, भोत दिन बाद फोन किया भाई? अरे तेरे कु एक भोत मजेदार बात बताने के वास्ते फोन किया। चिंकी के बाप से फिर कोई लफ्ड़ा